“रेगिस्तानी क्षेत्र का एक ऐसा धूसर रंग का पक्षी जो आँखों के सामने होते हुए भी सामने नहीं होता और जिसे खतरे के समय अपने पंखों से ज्यादा पैरो पर भरोसा है “

क्रीम कलर्ड कोर्सर, उन पक्षियों में से एक है जिन्हें आप किताबों और संदर्भों में देख उनकी प्रशंसा किए बिना नहीं रह सकते! साफ़-सुथरा भूरे रंग का शरीर और लम्बे, हल्के भूरे रंग के पैर जिनसे ये शुष्क रेगिस्तानी इलाकों में कभी आहिस्ता चलकर तो कभी दौड़-दौड़ कर कीटों को पकड़ते हैं।लम्बे पैर वाला यह पक्षी समतल,रेतीलेअर्ध-रेगिस्तान और रेगिस्तान में जीवन व्यतीत करने के लिए बहुत अच्छी तरह से अनुकूलित है जहाँ यह दोपहर की गर्मी के दौरान भी सक्रिय रहते हैं। इसका रेतीला- भूरा रंग इसे रेगिस्तानी परिवेश में अदृश्य बनता है जिसकी वजह से केवल उड़ान भरने पर ही इसे स्पष्ट देखा और पहचाना जा सकता है। खतरा महसूस होने की परिस्थिति में उड़ने कि अपेक्षा तेजी से भागना पसंद करता है और इस दौरान बीच-बीच में रुक, खड़े हो आसपास के इलाके में एक नज़र मार हलचल का ब्यौरा लेता है।

क्रीम कलर्ड कोर्सर, एक वेडर पक्षी (छिछले स्थान का पक्षी) है जो प्रेटिनकोल व कोर्सर परिवार “Glareolidae” का सदस्य है। इसका वैज्ञानिक नाम “Cursorius cursor” है जो एक लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ Runner (भागने वाला) होता है। इसका नाम, इसकी सामान्य आदत का वर्णन करता है क्योंकि यह उड़ने से ज्यादा दौड़ते हुए छोटे कीटों का शिकार करते हैं।

क्रीम कलर्ड कोर्सर की आँखों के पास एक स्पष्ट गहरे काले रंग की पट्टी और आँखों के ऊपर सफ़ेद भौंहें होती हैं जो गर्दन के पीछे जाकर आपस में मिल कर अंग्रेजी अक्षर “V” की आकृति बनाती हैं, जिसके कारण इसे स्पष्ट रूप से पहचाना जा सकता है। (फोटो: डॉ. धर्मेंद्र खांडल)

निरूपण (Description):

क्रीम कलर्ड कोर्सर, अपने शरीर की बनावट, लम्बी टांगे और लम्बे पंखों के कारण दूर से देखने पर कुछ हद तक प्लोवर व लैपविंग जैसा लगता है। 20 से 25 सेमी की लंबाई वाले इस छोटे पक्षी का वजन 115 से 160 ग्राम होता है। इसके शरीर का रंग रेतीला-भूरा तथा शरीर का निचला भाग (पेट के पास) हल्के भूरे व कभी-कभी सफ़ेद रंग का होता है। 50 से 60 सेमी तक विस्तार वाले इसके पंखों का सिरा और अंदरूनी हिस्सा काले रंग का होता हैं जो उड़ान के समय स्पष्ट दिखाई देता हैं। उड़ते समय यह अपने नुकीले पंखों और गहरे रंग के अंडरविंग्स के कारण एक प्रेटिनकोल जैसा भी प्रतीत होता है। माथा और गर्दन भूरे रंग का होता है। इसकी आँखों के पास एक स्पष्ट गहरे काले रंग की पट्टी और आँखों के ऊपर सफ़ेद भौंहें होती हैं जो गर्दन के पीछे जाकर आपस में मिल कर अंग्रेजी अक्षर “V” की आकृति बनाती हैं। इसकी काली चोंच छोटी, पतली और नीचे की ओर घुमावदार होती है। टंगे लम्बी सिल्वर ग्रे होती हैं। पीछे से इसका सिर व गर्दन हल्के नीले व ग्रे रंग की होती है। इसमें नर और मादा रंग-रूप में दोनों एक से ही दिखते हैं।

इसके किशोरों (juvenile) में सिर, गर्दन व गर्दन का पिछला हिस्सा सामान रूप से भूरे रंग का होता है, भौंहें क्रीम रंग की तथा आँखों की काली पट्टी अस्पष्ट होती है। शरीर के ऊपरी हिस्सों पर गहरे रंग की लकीरे (dark streaking) होती हैं।आमतौर पर, रंग-रूप व जीव-सांख्यिकी (Biometrics) में भिन्नता के आधार पर इसकी तीन उप-प्रजातीयां पायी जाती हैं:

  1. c. cursor, (Latham, 1787): यह उप-प्रजाती कैनरी द्वीप और उत्तरी अफ्रीका, अरब प्रायद्वीप से इराक तक फैली हुई है तथा ये सर्दियों में प्रवास कर साहेल क्षेत्र और सऊदी अरब जाते है।
  2. c. bogolubovi, (Zarudny, 1885): यह उप-प्रजाती उत्तरी-पश्चिमी भारत से दक्षिणी पाकिस्तान, दक्षिणी-पूर्वी टर्की से ईरान और अफगानिस्तान में पायी जाती है, तथा दक्षिणी-पूर्वी टर्की से ईरान तक फैली हुई आबादी सर्दियों में प्रवास कर उत्तरी-पश्चिमी भारत और दक्षिणी पाकिस्तान आती है।भारत में पायी जाने वाली यह उप-प्रजाती गुजरात, राजस्थान,हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक वितरित है।
  3. c. exsul, (Hartert, 1920): यह उप-प्रजाती केप वर्डे द्वीप समूह तक सीमित है तथा किसी भी मौसम में प्रवास नहीं करती है।

अंग्रेजी पक्षी विशेषज्ञ व् चित्रकार “John Gould” द्वारा बनाया गया तथा उनकी पुस्तक “The Birds of Great Britain” में प्रकाशित क्रीम कलर्ड कोर्सर का चित्र

प्राकर्तिक इतिहास (Natural History):

क्रीम कलर्ड कोर्सर, पूरे विश्व-भर में व्यापक रूप से वितरित प्रजाती है और शायद इसीलिए आज जब हम इसके इतिहास पर नजर डालते हैं तो समय-समय परकई पक्षी विशेषज्ञों द्वारा दिए गए इसके विभिन्न नामों और चित्रण का व्याख्यान सामने आता है। इसका जिक्र सबसे पहले बुफोन नामक फ्रेंच प्रकृतिवादी ने किया था, तथा उन्होंने इसे “क्रीम कलर्ड प्लोवर” व “Le Courvite” नाम देकर शब्दों में इसका चित्रण व्यक्त किया था।

वर्ष 1787 में एक अंग्रेजी चिकित्सक, प्रकृतिवादी व लेखक, जॉन लैन्थम (John Lantham) ने अपनी पुस्तक “General Synopsis of Birds” में इसका सबसे पहला चित्र प्रकाशित किया। लैन्थम ही पहले शख्स जिन्होंने इस कोर्सर को इंग्लैण्ड में पहचाना था। जॉन लैन्थम द्वारा कई सारे ऑस्ट्रेलियाई पक्षियों के नमूनों की जांच कर नाम दिए जाने कि वजह से उन्हें ऑस्ट्रेलियाई पक्षी-विज्ञान के “दादा” (Grandfather of Australian ornithology) के रूप में जाना जाता है।

लैन्थम अपनी पुस्तक में इसे क्रीम कलर्ड प्लोवर नाम से संबोधित करते हुए लिखते हैं की वर्ष 1785 इस पक्षी को विलियम हैमंड ने अपनी संपत्ति में बन्दुक से मारा था। उनके विवरण के अनुसार यह पक्षी दौड़ने में बहुत ही तेज था जिसकी वजह से हैमंड दो बार निशाने से चुके। यह पक्षी अन्य प्लोवर से अलग था, क्योंकि इसके सिर के पीछे दो काली पट्टियां आपस में जुड़ कर “V” आकृति बना रही थी। भले ही लैन्थम इस पक्षी को देखने व लिखने वाले पहले इंसान थे, परन्तु उन्होंने वर्ष 1787 में इसको कोई वैज्ञानिक नाम नहीं दिया था।

कई सारे नामों में Cursorius gallicus” इसका सबसे प्रसिद्ध नाम रहा है जो कि वर्ष 1789 में जोहान फ्रेडरिक गमेलिन (Johann Friedrich Gmelin) द्वारा द्विपद नामकरण पद्धति का अनुसरण करते हुए दिया था। गमेलिन, एक जर्मन प्रकृतिवादी, वनस्पति विज्ञानी, एंटोमोलॉजिस्ट, हर्पेटोलॉजिस्ट, और मैलाकोलॉजिस्ट थे। इन्होंने विभिन्न पुस्तकें लिखी तथा 1788 से 1789 के दौरान कार्ल लिनिअस (Carl Linnaeus) कृत Systema Naturae का 13वां संस्करण भी प्रकाशित किया। इस संस्करण में जॉन लैन्थम कि पुस्तक “General Synopsis of Birds” में वैज्ञानिक नाम के बिना सूचीबद्ध कई नई प्रजातीयों के विवरण और वैज्ञानिक नाम शामिल किये गए।

आज इस पक्षी का विश्वव्यापी मान्य सामान्य नाम “क्रीम कलर्ड कोर्सर” तथा इसके वैज्ञानिक नाम के साथ लैन्थम का नाम ही जोड़ा जाता है क्योंकि सर्वप्रथम लैन्थम द्वारा ही इस पक्षी का दस्तावेजीकरण किया गया था।

वर्ष 1787 में अंग्रेजी प्रकृतिवादी व लेखक, जॉन लैन्थम (John Lantham) ने अपनी पुस्तक “General Synopsis of Birds” में इसका सबसे पहला चित्र प्रकाशित किया तथा उस समय इसे “क्रीम कलर्ड प्लोवर” के नाम से जाना जाता था

वितरण व आवास (Distribution & Habitat):

भारत में क्रीम कलर्ड कोर्सर की उप-प्रजाती C. c. bogolubovi पायी जाती है। यह भारत सहित पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, कैनरी द्वीप समूह, केप वर्डे, उत्तरी अफ्रीका और दक्षिणी-पश्चिमी एशिया में भी पायी जाती है। यह आमतौर पर जंगल में नहीं रहते बल्कि खुले मैदानों, सम-शीतोष्ण (Temperate) घास के मैदान और उष्णकटिबंधीय (Tropical) व उपोष्णकटिबंधीय (Subtropical) शुष्क झाड़ियों वाले प्रदेशों में निवास करते हैं। यहाँ ये खुले, शुष्क, रेगिस्तानी व अर्द्ध-रेगिस्तानी क्षेत्र, जो बहुत ही गर्म, रेतीली व पथरीली, तथा बहुत कम या ना के बराबर वनस्पति वाली पारिस्थितिकी प्रणालियों में निवास करती हैं। यह खेती वाले क्षेत्रों के किनारों पर छितराई हुई वनस्पतियों वाले शुष्क और खाली मैदानों में भी पाए जाते हैं। साथ ही इन्हें कम घास वाले मैदानों, नमकीन दलदल और पथरीली सड़कों के आसपास भी देखा जा सकता है।

भारत में क्रीम कलर्ड कोर्सर का वितरण दर्शाता मानचित्र (Source: Birdlife.org and Grimmett 2014)

आहार व्यवहार (Feeding habits):

क्रीम कलर्ड कोर्सर के आहार में ज्यादातर कीड़े और उनके लार्वा होते हैं। हालाँकि, ये अपने छोटे पंखों के साथ दृढ़ता से उड़ सकते हैं, परन्तु फिर भी कीड़ों को पकड़ने के लिए यह सभी जगह चल व दौड़कर जाते हैं। कई बार यह मिट्टी को खोद कर कुछ कीटों को परेशान कर बिल से बाहर निकालने की कोशिश भी करते हैं। दीमक, चींटियाँ, भृंग, कीड़े, मक्खियाँ, तिलचट्टे, टिड्डियाँ, मोलस्क और विभिन्न प्रकार के बीज इनके प्राथमिक भोजन हैं।

प्रजनन (Breeding):

भले ही क्रीम कलर्ड कोर्सर की तीन उप-प्रजातीयां विश्वभर में फैली हुई पायी जाती हो, परन्तु इनकी प्रजनन फ़ीनोलॉजी एक सी ही होती हैं (मैकलीन 1996)। आबादी और स्थान के अनुसार इनका प्रजनन काल मुख्य रूप से फरवरी से सितंबर तक होता हैं तथा यह माना जाता हैं की इतने लम्बे समय का प्रजनन काल दूसरी बार बच्चे देने या फिर शुष्क क्षेत्रों में बारिश होने के कारण बच्चे देने के परिणाम स्वरूप होता है। यदि संदर्भों को देखा जाये तो बहुत ही कम ऐसे रिकार्ड हैं जब फरवरी से सितंबर के अलावा इसका प्रजनन देखा गया हो। उत्तरी-पश्चिमी भारत में मैकलीन (1996) ने फरवरी माह में ही इसके चुचो को देखा था। यह कोर्सर मिट्टी उथल सीधा जमीन पर अपना घोंसला बनाते हैं। यह एक बार में 2 अंडे देते हैं जो धब्बेदार औरअच्छी तरह से ज़मीन पर छलावरण करते हैं। चुचो को शुरुवाती दौर में माता-पिता द्वारा भोजन उपलब्ध करवाया जाता है तथा लगभग एक सप्ताह बाद वे स्वयं भोजन खोजने लग जाते हैं।

संरक्षण स्थिति (Conservation status):

इस कोर्सर की वैश्विक आबादी निर्धारित नहीं की गई है परन्तु इसकी आबादी का चलन कम होता दिखाई दे रहा है क्योंकि इसकी पूरी वितरण सीमा में इसके सामान्य से असामान्य होने की सूचनाएं मिली हैं। इसका विस्तार बहुत ही व्यापक है तथा अन्य मापदंडों के अनुसार अभी यह संकटग्रस्त होने की सीमा रेखा से कोसों दूर है। इसीलिए इसे IUCN द्वारा Least Concern श्रेणी में रखा गया है।

सन्दर्भ:
  • Blanford, W.T. 1898. The Fauna of British India including Ceylon and Burma. volume IV. The secretary of State for India in counsil. London
  • Cover Image Picture Courtesy Dr. Dharmendra Khandal.
  • Gmelin, J.F. 1789. Systema Naturae. Part 2.
  • Gould, J. 1873. The Birds of Great Britain. Volume IV. London
  • Grimmett, R., Inskipp, C. and Inskipp, T. 2014. Birds of Indian Subcontinent. Digital edition.
  • http://datazone.birdlife.org/species/factsheet/cream-coloured-courser-cursorius-cursor
  • Lantham, J. 1784. A General synopsis of Birds. Volume III, Part-I. London
  • Lantham, J. 1787. Supplement to the General synopsis of Birds. London
  • Lantham, J. 1824. A General History of Birds. Volume IX. London.

 

 

 

 

 

 

Ms.Meenu Dhakad has worked with Tiger Watch as a conservation biologist after completing her Master's degree in the conservation of biodiversity. She is passionately involved with conservation education, research, and community in the Ranthambhore to conserve wildlife. She has been part of various research projects of Rajasthan Forest Department.