Waders

वेडर्स ऑफ द इंडियन सबकॉन्टीनैन्ट: भारतीय उपमहाद्वीप के परिप्रक्ष में एक बेहतरीन सन्दर्भ ग्रन्थ

जलाशयों के किनारे-किनारे, जल रेखा व कीचड़युक्त आवास को पसंद करने वाले पक्षियों को ‘‘वेडर्स’’ नाम से जाना जाता है। इस वर्ग के पक्षी तैरते नहीं हैं बल्कि पानी के किनारे-किनारे या कुछ दूर पानी या कीचड़ में चलते हुये ही भोजन ढूंढते हैं। इस वर्ग के कुछ पक्षी पानी के अन्दर उगे पौधों की पत्तियों या दूसरी तैरती हुई वस्तुओं पर भी चलकर अपना भोजन ढंूढ लेते हैं। इस वर्ग में स्नाइप, जकाना, ऑयस्टरकैचर, प्लोवर, लैपविंग, वुडकॉक, गौडविट करलेव, विमब्रेल, रैडशैंक, ग्रीनशैंक, सेन्डपाइपर, टैटलर, टर्नस्टोन, डॉविचर, सैन्डरलिंग, स्टिन्ट, रफ, आइबिसबिल, स्टिल्ट, एवोसेट, फैलारोप, थिक-नी, करसर एवं प्रेटिनकॉल शामिल हैं।

इस वर्ग के अनेक पक्षियों को सही-सही पहचानना कई वर्ष तक पक्षी अवलोकन करने के बाद भी कठिन लगता है। प्रायः कई पक्षियों के अच्छे क्लोज अप फोटो खींच लेने के बाद फोटो को तसल्लीपूर्वक देखने पर भी पहचान में संशय बना रहता है। वेडर वर्ग के देशान्तर गमन कर सर्दी में हमारे जलाशयों पर पहुंचने वाले पक्षियों को भी पहचानने में कठिनाई बनी रहती है।

इस कठिनाई को दूर करने का सराहनीय प्रयास भारत के जाने-माने पक्षीविद   श्री हरकीरत सिंह संघा ने किया है। विशेष बात यह है कि श्री संघा राजस्थान के निवासी हैं। उन्होने जो स्तुतियोग्य पुस्तक प्रकाशित की है उसका विवरण निम्न है:-

पुस्तक का नाम  :-  वेडर्स ऑफ द इंडियन सब-कॉन्टीनेन्ट ( Waders of the Indian subcontinent )
भाषा                :- अंग्रेजी
पृष्ठ संख्या         :-  XVI + 520
प्रकाशन वर्ष      :- 2021
प्रकाशक           :- लेखक स्वयं (विष्व प्रकृति निधि-भारत के आंषिक सहयोग से)
मूल्य                 :-3500.00 रूपये
मंगाने का पता     :- श्री हरकीरत सिंह संघा, बी-27, गौतम मार्ग, हनुमान नगर,
जयपुर-302021, भारत

इस संदर्भ ग्रन्थ में 84 प्रजातियो के वेडर वर्ग के पक्षियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है। प्रत्येक प्रजाति के स्थानीय नाम, पुराने नाम, वितरण, फील्ड में  पहचानने हेतु विशेष गुणों की जानकारी, शारीरिक नाप, आवास, स्वभाव, भोजन, प्रजनन, गमन, संरक्षण स्थिति आदि की विस्तृत, आद्यतन एवं प्रमाणिक जानकारी प्रस्तुत की गई है। पुस्तक में 450 रंगीन फोटो, 540 पेन्टिंग, उपमहाद्वीप में वितरण को स्पष्टता से प्रदर्शित करने वाले रंगीन मैप आदि प्रचुरता से दिये गये हैं। इतनी सामग्री को एक ही जगह सहज उपलब्धता से हम फील्ड में वेडर्स को अच्छी तरह पहचान सकते हैं। इस पुस्तक की छपाई अच्छी है एवं कागज भी उत्तम क्वालिटी का प्रयोग किया गया है। कवर पेज आकर्षक व विषय को सार्थक करता है। कुल मिलाकर यह ग्रन्थ गागर में सागर है।

यह पुस्तक भारत, बांगलादेश, भूटान, मालद्वीप, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका एवं चांगोस, जो कि भारतीय उपमहाद्वीप के देश हैं, सभी के लिये समान रूप से उपयोगी है।

यह पुस्तक पठनीय व संग्रहणीय है। इसे सहजता से फील्ड में उपयोग किया जा सकता है। यह पुस्तक हर पक्षी अवलोकक के लिये बहुत ही उपयोगी फील्ड गाइड तो है ही, शोधार्थियों व अध्यापकों हेतु भी अत्यंत उपयोगी संदर्भ है।

Discussion

2 comments

  1. Pratap Singh Choondawat

    Well observed and documented

  2. हरकीरत सांगा के लेख और शोधों और दामोदर गुर्जर आर्टिस्ट की पेंटिंग्स ने वेडर्स की पहचान के लिए एक बहुत अच्छी पुस्तक निकली हे बहुत साल लग गए इसको बनाने में हरकीरत से इस आर्टिस्ट से मैने ही मिलवाया था जिसके कारण पुस्तक में चार चांद लग गए

Leave a comment

Your email address will not be published.