आबू पर्वत के गुलाबों का इतिहास
गुलाब रोजेसी कुल के रोज़ा वंश (Rosa Genus) की एक जानी पहचानी झाडी है। यूँ तो सार्वजनिक उद्यानों से…
राजस्थान में लोग जिन पेड़ों, जीवों और जल-स्रोतों के बीच रहते आए हैं, उनके बारे में यहाँ के समुदायों का अपना ज्ञान है — स्थानीय नाम, बरतने के तरीके, वर्जनाएँ और किस्से। यह श्रेणी उसी ज्ञान को दर्ज करती है, और यह देखने से भी नहीं कतराती कि वह क्षेत्र में की गई पड़ताल से कहाँ मेल खाता है और कहाँ नहीं।
इसमें खेजड़ी और रोहिड़ा से जुड़ी परम्पराएँ हैं, आबू पर्वत के गुलाबों का इतिहास, खर्चिया गेंहू जैसी स्थानीय किस्में, तीज यानी लाल मखमली कीड़े और पत्थर इकट्ठा करने वाले ककरगड़ा सांप की लोक-मान्यताएँ, जल संरक्षण की पुरानी परिपाटी, बाजदारी, और नाथू बावरिया के परिवार की चार पीढ़ियों की कहानी। कुल 26 लेख, अधिकतर हिन्दी में।
गुलाब रोजेसी कुल के रोज़ा वंश (Rosa Genus) की एक जानी पहचानी झाडी है। यूँ तो सार्वजनिक उद्यानों से…
While working with farmers in Pali district I came across a local land race of wheat which is…
बरगद का राजस्थान में बहुत सम्मान होता है। बरगद को राजस्थान में बड़, बड़ला, वड़ला आदि स्थानीय नामों…