रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में प्रोसोपिस जूलिफ्लोरा का उन्मूलन
वर्ष 2022 में टाइगर रिजर्व बनने से पहले रामगढ़ विषधारी का बड़ा हिस्सा जूलिफ्लोरा से भरा था। तत्कालीन…
राजस्थान के पेड़ और झाड़ियाँ — पहचान, वितरण, फूलने-फलने का समय, और उनसे जुड़ा पारंपरिक व्यवहार। अट्ठाईस में से सत्ताईस लेख हिंदी में हैं, और इनमें सबसे बड़ी संख्या प्रजाति परिचय की है।
यहाँ राजस्थान के विशालतम बरगद, पीले पुष्प वाले पलाश, आठ साल में एक बार फूलने वाली कार्वी और बारहमासी फल देने वाली आम की किस्म ‘सदाबहार’ पर लेख हैं; साथ ही अरावली के वृक्षों, राजस्थान के वन-प्रकारों, सीतामाता तथा टॉडगढ़-रावली अभयारण्यों, और फैलती हुई विदेशी आक्रामक वनस्पतियों पर लिखी सामग्री।
वर्ष 2022 में टाइगर रिजर्व बनने से पहले रामगढ़ विषधारी का बड़ा हिस्सा जूलिफ्लोरा से भरा था। तत्कालीन…
राजस्थान राज्य किलों, महलों, गढों और गढियों के लिए जाना जाता रहा है। राजा-महाराजा, राव-उमराव सब अपनी -…
देश के ग्रामीण अंचलों में जगह-जगह तालाब (जोहड) मिलते हैं जिनका आर्थिक, धार्मिक, सांस्कृतिक महत्व तो है ही…
गंध सिर्फ़ गंध नहीं, स्मृति, पहचान और भविष्य की चेतावनी भी होती है। अगर हम इन सूक्ष्म संकेतों…
हम सब ने कहीं न कही पेड़ों पर पक्षियों को बैठे देखा है जो हमारा ध्यान आकर्षित करते…
आजकल हर आदमी को जल्दी से जल्दी, सघन, सदाबहार व आकर्षक हरियाली चाहिए। आम आदमी से लेकर स्वंयसेवी…
यह जगह अनोखी है, हर कोना प्रकृति के रंग से रंगा हुआ और इतिहास की गाथाओं से…
राजस्थान के मरुस्थल की कठोरता की पराकाष्ठा इन छप्पन्न के पहाड़ों में देखने को मिलती हैं।यह ऊँचे तपते…
क्या कोई यह विश्वास करेगा की राजस्थान के एक किसान ने आम की एक ऐसी नई किस्म…
सन 1453 में , एक दूसरे के धुर विरोधी, मेवाड़ के महाराणा कुम्भा और मारवाड़ के राव…