जयपुर में बढ़ते तेंदुआ–मानव संघर्ष के संदर्भ में एक अन्य दृष्टिकोण
जयपुर में तेंदुआ-मानव संघर्ष बढ़ा क्यों? जब सब कहते हैं जंगल में कमी है, तो मेरा मानना है…
यह श्रेणी सरिस्का बाघ अभयारण्य और अलवर से लेकर जयपुर के आसपास के जंगलों — झालाना, नाहरगढ़, आमागढ़ — और दौसा तक के क्षेत्र की सामग्री रखती है। अभी इसमें 14 लेख हैं, जिनमें से अधिकांश हिन्दी में हैं।
यहाँ सरिस्का में बाघों की क्षेत्र सीमाओं का प्रारूप, भामर मधुमक्खी पर हुआ अध्ययन, और यह सवाल कि मृत बाघ को मृतभक्षी खाते हैं या नहीं — सब दर्ज है। साथ में वन रक्षक अभिषेक सिंह शेखावत और राजाराम मीणा के काम पर लिखा गया है, दुर्लभ पेन्टेड चमगादड़ पर, और पुलिस के तीतर व एक बाजदार के फाल्कन की पुरानी कहानी पर भी।
जयपुर में तेंदुआ-मानव संघर्ष बढ़ा क्यों? जब सब कहते हैं जंगल में कमी है, तो मेरा मानना है…
A Majestic Chronicle of Wilderness, Valor, and Heritage Col. Kesari Singh Kanota - The Tiger is not merely…
In nature, it is very rare to see the hunter become the hunted. However, there is just such…
यह बहुत दुर्लभ है कि, प्रकर्ति में शिकारी खुद शिकार बन जाता है। एक बार राजस्थान के पुलिस…
A widely held belief is that scavengers do not feed on the carcass of a dead tiger because…
अक्सर लोग मानते हैं कि, बाघ के मरने के बाद उसके मृत शरीर को खाने कोई भी प्राणी…
क्या सरिस्का में बाघों की संख्या में हुई वृद्धि इसकी समग्र सफलता का एक पैमाना हो सकती है…
वैज्ञानिकों और बाघ प्रेमियों में हमेशा से यह एक चर्चा का विषय रहा है कि, आखिर बाघ का…
राजाराम, एक ऐसे वन रक्षक जिन्हे वन में पाए जाने वाली जैव-विविधता में घनिष्ट रुचि है जिसके चलते…
अभिषेक एक सक्षम एवं संपन्न परिवार में जन्म लेने के बावजूद, अपने लिए प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण जैसे…