सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य – राजस्थान के विशिष्ट वन्यजीवों का पवित्र उपवन
कांठल प्रदेश में सागवान वनों से आच्छादित, तीन विभिन्न भूमि संरचनाओं (अरावली, विंध्यन और मालवा) के संगम पर…
राजस्थान के पेड़ और झाड़ियाँ — पहचान, वितरण, फूलने-फलने का समय, और उनसे जुड़ा पारंपरिक व्यवहार। अट्ठाईस में से सत्ताईस लेख हिंदी में हैं, और इनमें सबसे बड़ी संख्या प्रजाति परिचय की है।
यहाँ राजस्थान के विशालतम बरगद, पीले पुष्प वाले पलाश, आठ साल में एक बार फूलने वाली कार्वी और बारहमासी फल देने वाली आम की किस्म ‘सदाबहार’ पर लेख हैं; साथ ही अरावली के वृक्षों, राजस्थान के वन-प्रकारों, सीतामाता तथा टॉडगढ़-रावली अभयारण्यों, और फैलती हुई विदेशी आक्रामक वनस्पतियों पर लिखी सामग्री।
कांठल प्रदेश में सागवान वनों से आच्छादित, तीन विभिन्न भूमि संरचनाओं (अरावली, विंध्यन और मालवा) के संगम पर…
दुर्लभ वृक्ष का अर्थ है वह वृक्ष प्रजाति जिसके सदस्यों की संख्या काफी कम हो एवं पर्याप्त समय…
वैसे तो खरपतवार की परिभाषा कोई आसान नहीं है परन्तु फिर भी खरपतवार वे अवांछित पौधे होते हैं…
आकल जीवाश्म उद्यान (Akal Fossil Park or Akal Wood Fossil Park) राजस्थान का एक दर्शनीय स्थान है। यह…
बरगद का राजस्थान में बहुत सम्मान होता है। बरगद को राजस्थान में बड़, बड़ला, वड़ला आदि स्थानीय नामों…