पुलिस का तीतर और एक बाजदार का फाल्कन
यह बहुत दुर्लभ है कि, प्रकर्ति में शिकारी खुद शिकार बन जाता है। एक बार राजस्थान के पुलिस…
राजस्थान में लोग जिन पेड़ों, जीवों और जल-स्रोतों के बीच रहते आए हैं, उनके बारे में यहाँ के समुदायों का अपना ज्ञान है — स्थानीय नाम, बरतने के तरीके, वर्जनाएँ और किस्से। यह श्रेणी उसी ज्ञान को दर्ज करती है, और यह देखने से भी नहीं कतराती कि वह क्षेत्र में की गई पड़ताल से कहाँ मेल खाता है और कहाँ नहीं।
इसमें खेजड़ी और रोहिड़ा से जुड़ी परम्पराएँ हैं, आबू पर्वत के गुलाबों का इतिहास, खर्चिया गेंहू जैसी स्थानीय किस्में, तीज यानी लाल मखमली कीड़े और पत्थर इकट्ठा करने वाले ककरगड़ा सांप की लोक-मान्यताएँ, जल संरक्षण की पुरानी परिपाटी, बाजदारी, और नाथू बावरिया के परिवार की चार पीढ़ियों की कहानी। कुल 26 लेख, अधिकतर हिन्दी में।
यह बहुत दुर्लभ है कि, प्रकर्ति में शिकारी खुद शिकार बन जाता है। एक बार राजस्थान के पुलिस…
कर्नल केसरी सिंह ने अपनी एक पुस्तक में रणथम्भोर के एक स्थानीय व्यक्ति नाथू बावरिया का जिक्र किया…
हाल ही में राजस्थान सरकार ने आमजन के स्वास्थ्य को सुरक्षित करने के लिए "घर-घर औषधि योजना" का…
अरावली राजस्थान की मुख्य पर्वत शृंखला है जो छोटे और मध्य आकर के वृक्षों से आच्छादित है, इन…
राजस्थान को मुख्यतया दो भागों में बांटा जा सकता हैं - मरुस्थलीय हिस्सा एवं अरावली अथवा विंध्य पहाड़ियों…
विभिन्न वनस्पत्तियों के लिए स्थानीय समूदायों का पारम्परिक ज्ञान हमेशा से ही एक महत्त्वपूर्ण सामाजिक विरासत है, परन्तु…
To study water conservation closely, you can base the culture of the amazing Johads and Kunds of Shekhawati……
जल संरक्षण का सूक्ष्मता से अध्ययन के लिए आप शेखावाटी के अद्धभुत जोहडों और कुंडो की संस्कृति को…
थार के रेगिस्तान में एक रहस्यमय सांप सोये हुए लोगों को बिना डसे ही मारने के लिए जाना…
मानसून की कुछ बौछारो के साथ क्या यह लाल रंग का कीडेनुमा जीव भी बरसता है? मेरे स्कूल…