पारंपरिक ज्ञान

राजस्थान में लोग जिन पेड़ों, जीवों और जल-स्रोतों के बीच रहते आए हैं, उनके बारे में यहाँ के समुदायों का अपना ज्ञान है — स्थानीय नाम, बरतने के तरीके, वर्जनाएँ और किस्से। यह श्रेणी उसी ज्ञान को दर्ज करती है, और यह देखने से भी नहीं कतराती कि वह क्षेत्र में की गई पड़ताल से कहाँ मेल खाता है और कहाँ नहीं।

इसमें खेजड़ी और रोहिड़ा से जुड़ी परम्पराएँ हैं, आबू पर्वत के गुलाबों का इतिहास, खर्चिया गेंहू जैसी स्थानीय किस्में, तीज यानी लाल मखमली कीड़े और पत्थर इकट्ठा करने वाले ककरगड़ा सांप की लोक-मान्यताएँ, जल संरक्षण की पुरानी परिपाटी, बाजदारी, और नाथू बावरिया के परिवार की चार पीढ़ियों की कहानी। कुल 26 लेख, अधिकतर हिन्दी में।

कुछ परम्परागत प्रथाऐं एवं उनके हानिकारक प्रभाव
पारंपरिक ज्ञान

कुछ परम्परागत प्रथाऐं एवं उनके हानिकारक प्रभाव

विभिन्न वनस्पत्तियों के लिए स्थानीय समूदायों का पारम्परिक ज्ञान हमेशा से ही एक महत्त्वपूर्ण सामाजिक विरासत है, परन्तु…

Traditional water reservoirs of Shekhawati
पारंपरिक ज्ञान

Traditional water reservoirs of Shekhawati

To study water conservation closely, you can base the culture of the amazing Johads and Kunds of Shekhawati……