राजस्थान के संरक्षित क्षेत्र
मनुष्यों द्वारा मुख्यतः खेती और वनों के लिए भूमि उपयोग से भूमि का परिदृश्य बदल रहा है। आज,…
संरक्षण केवल चेतावनी नहीं है; कहीं-कहीं कुछ किया भी जाता है। यह श्रेणी राजस्थान में हुए ऐसे प्रयासों का ब्यौरा रखती है — पुनःस्थापन, आवास की सुरक्षा, सरकारी योजनाएँ और गाँव के सामूहिक निर्णय। 2020 से अब तक 29 लेख, लगभग दो-तिहाई हिन्दी में।
इनमें डूंगरपुर राज्य का बाघ पुनःस्थापन, सरिस्का में बाघों की क्षेत्र सीमाओं का सवाल, जोड़बीड़ और करौली की ठेकरा गौशाला जैसे गिद्ध आश्रय, मेनार का एक साधारण गाँव-तालाब से महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र बन जाना, घर-घर औषधि योजना, और फतेह सिंह राठौड़ के काम पर लिखे लेख शामिल हैं।
मनुष्यों द्वारा मुख्यतः खेती और वनों के लिए भूमि उपयोग से भूमि का परिदृश्य बदल रहा है। आज,…
जोड़बीड़, एशिया का सबसे बड़ा गिद्ध स्थल, जो राजस्थान में प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान भी…
वर्तमान में संरक्षित क्षेत्रों (अभयारण्य / राष्ट्रीय उद्यान) को बाघ अभ्यारण्य में परिवर्तित करने की लगातार मांग हो…
There is a persistent demand for converting Protected Areas (sanctuaries/ national park) into tiger reserves in India is…
“जनता जैव विविधता रजिस्टर “ हमारी जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान को जानने, उपयोग करने और सुरक्षित रखने के…
बोखा बाघ अब इतिहास का एक किस्सा भर लगता है, पर यह वह बाघ था जिसने डूंगरपुर राज्य…
ये कहानी है राजस्थान के मरुस्थल क्षेत्र में स्थित एक जिले - बीकानेर की जो कभी एक स्वतंत्र…
मजबूत इरादों के धनी, प्रकृति प्रेमी, दूरदर्शी सोच रखने वाले इस इंसान ने रणथम्भौर के लिए हर चुनौती…
The year 1972 marks a major milestone in the conservation history of India. With the promulgation of the…
Fateh Singh Rathore, a world-renowned expert on wild tigers, was the man behind the development of Ranthambhore, then…