राजस्थान में पीले पुष्प वाले पलाश
फूलों से लदे पलाश के पेड़, यह आभास देते हैं मानो वन में अग्नि दहक रही है I…
यह श्रेणी उन लेखों की है जो राजस्थान की प्रजातियों और आवासों पर पड़ रहे दबाव को दर्ज करते हैं — क्या घट रहा है, कहाँ घट रहा है, और किस वजह से। 2020 से अब तक के 78 लेख यहाँ हैं, अधिकतर हिन्दी में और कुछ अंग्रेज़ी में।
बाघ यहाँ सबसे बार-बार लौटने वाला विषय है, विशेषकर रणथंभोर में संरक्षण की वर्तमान चुनौतियाँ। इनके साथ सियागोश के सिकुड़ते इलाक़े, गोडावण, स्मूद कोटेड ओटर, ढोल और गिद्धों पर लेख हैं; चंबल के घड़ियाल और मगरमच्छ पर; आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी से वन्यजीवों को ख़तरे पर; और थार के उन पेड़-झाड़ियों पर जिनके बिना रेगिस्तान अधूरा है।
फूलों से लदे पलाश के पेड़, यह आभास देते हैं मानो वन में अग्नि दहक रही है I…
साँड़ा, पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तान में पायी जाने वाली छिपकली, जो मरुस्थलीय खाद्य श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण भूमिका…
ग्रीन मुनिया लाल चोंच वाली, पृष्ठ भाग पर हरे रंग की भिन्न-भिन्न आभा लिये, छोटे आकार की ‘‘फिंच‘‘…
दुर्लभ वृक्ष का अर्थ है वह वृक्ष प्रजाति जिसके सदस्यों की संख्या काफी कम हो एवं पर्याप्त समय…
साकेर फाल्कन, भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाने वाला सबसे बड़ा फाल्कन है। एक शिकारी के रूप में यह…
Saker falcon is the largest falcon seen in the Indian Subcontinent. Due to its prowess as a hunter,…
मगरमच्छ हमारे पारिस्थितिक तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, परन्तु अब यह हमारे घरों में क्यों आ रहा…
वैसे तो खरपतवार की परिभाषा कोई आसान नहीं है परन्तु फिर भी खरपतवार वे अवांछित पौधे होते हैं…
The year 1972 marks a major milestone in the conservation history of India. With the promulgation of the…