रामगढ विषधारी अभयारण्य–राजस्थान के बाघों का अनौपचारिक आशियाना
हमेशा से बाघों के अनुकूल रहा, राजस्थान का एक ऐसा क्षेत्र जो बाघ पर्यावास बनने को तैयार है…
इस श्रेणी का क्षेत्र रणथम्भौर टाइगर रिज़र्व और उससे लगा विंध्य किनारे का जंगल है — सवाई माधोपुर, कैलादेवी, सवाई मानसिंह अभयारण्य और करौली की पहाड़ियाँ। 2020 से अब तक के 55 लेख यहाँ दर्ज हैं, जिनमें दो-तिहाई हिंदी में हैं। बाघ यहाँ सबसे बार-बार लौटने वाला विषय है, पर श्रेणी उसी तक सीमित नहीं।
नर बाघ का अपने शावक के प्रति व्यवहार, शावकों की खेल-खेल में लड़ाई, रसेल्स वाइपर में नर संग्राम और दोंगड़े की बारिश के बाद उड़ने वाली पायोनीर तितलियाँ — ये सब यहीं मिलेंगी। साथ में लोग भी: फ़तेह सिंह राठौड़, आदित्य ‘डिक्की’ सिंह, और नाथू बावरिया के समुदाय का संघर्ष। वाल्मीक थॉपर की पुस्तक ‘टाइगर गोल्ड’ पर टिप्पणी और बाघ संरक्षण की वर्तमान चुनौतियाँ भी इसी श्रेणी में हैं।
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