रणथम्भौर में अनाथ बाघ शावकों का संरक्षण
बाघिन के मर जाने पर उसके बच्चों को पिता के रहते हुए भी अनाथ मान लिया जाता था…
स्तनधारी श्रेणी में राजस्थान के जंगली स्तनपायी जीवन पर 93 लेख हैं, अधिकांश हिंदी में। रणथम्भौर और विंध्य क्षेत्र की सामग्री यहाँ सबसे अधिक है, और बाघ अब तक सबसे ज़्यादा लिखा गया विषय — पुनर्वास, शिकार और उसके साथ काम करने वाले लोग।
पर श्रेणी बाघ तक सीमित नहीं। यहाँ चौसिंगा, स्लॉथ बेयर की जीवन यात्रा, ऊदबिलाव और कुत्तों के बीच संघर्ष, जयपुर में बढ़ते तेंदुआ–मानव टकराव पर एक अलग दृष्टिकोण, तथा फ़तेह सिंह राठौड़ और रणथम्भौर के रेस्क्यूमैन जैसे लोगों पर लिखे लेख भी हैं।
बाघिन के मर जाने पर उसके बच्चों को पिता के रहते हुए भी अनाथ मान लिया जाता था…
क्या सरिस्का में बाघों की संख्या में हुई वृद्धि इसकी समग्र सफलता का एक पैमाना हो सकती है…
एक गीदड़ माँ, अपनी मांद से कुछ दूर ऊंचाई पर बैठ कर आसपास का नज़ारा देख रही थी…
"भैराराम, एक ऐसे वनरक्षक जिन्हें कैमरा ट्रैपिंग कर वन्यजीवों की गतिविधियों की निगरानी करने तथा स्कूली छात्रों को…
बाघों के मध्य होने वाले संघर्ष के बारे में तो सभी जानते हैं परन्तु कई बार कुछ तनाव…
वैज्ञानिकों और बाघ प्रेमियों में हमेशा से यह एक चर्चा का विषय रहा है कि, आखिर बाघ का…
स्मूद कोटेड ओटर (Lutrogale perspicillata), एशिया में पाए जाने वाला सबसे बड़ा ऊदबिलाव जो नदी के स्वच्छ जल…
बाघ को वन पारिस्थितिक तंत्र का शीर्ष शिकारी माना जाता है परन्तु कई बार अन्य जानवरों के साथ…
बाघ हमेशा पानी में सावधानी से प्रवेश करता है क्योंकि पानी में अनजान खतरे हो सकते हैं। यहाँ…
रणथम्भोर के मुख्य बाघ क्षेत्र में जहाँ सिर्फ बाघों का दबदबा है में सियार (Golden Jackal) जैसे कुछ…