नर बाघ का अपने शावक के प्रति प्रेम

नर बाघ का अपने शावक के प्रति प्रेम

नर बाघ भी अपने शावकों के प्रति प्रेम दर्शाते हैं। रणथम्भोर में एक बाघ, मादा के क्षेत्र में आ कर दहाड़ लगाता है, मानो किसी से मिलने के लिए बेताब है।

नर बाघ का अपने शावक के प्रति प्रेम

कुछ समय पश्च्यात नर की उस पुकार पर, एक बाघिन अपनी शाविका के साथ उस स्थान पर आती है।

नर बाघ का अपने शावक के प्रति प्रेम

मादा बाघिन नर के व्‍यवहार पर किंचित आशंकित है, अतः पहले पानी के नाले पर जाकर पानी पीती है, और मोके का जायजा लेती है।

नर बाघ का अपने शावक के प्रति प्रेम

मादा अभी भी पूरी तरह आशवस्त नहीं है कि नर कैसे व्यव्हार करेगा और नर के मानसिक व्‍यवहार का अवलोकन करती है।

नर बाघ का अपने शावक के प्रति प्रेम

शाविका नर की तरफ बढ़ती है, मादा दूर से देखती है परन्तु नर बाघ के सामने वह आत्मसमर्पित महसूस करती है।

नर बाघ का अपने शावक के प्रति प्रेम

नर एवं शाविका एक दूसरे से प्रेम दर्शाते है।

यदपि इसके बाद  का चित्र इस कथा चित्र में नहीं है परन्तु मादा बाघिन तुरंत दोनों के मध्य आकर इन्हे अलग करती है एवं शाविका को नर से दूर ले जाती है।

 

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